• श्री हनुमानबाग मंदिर
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 श्री रामभक्त सेवा आश्रम / Shri Rambhakt Seva Aashram

श्रीराम आश्रय -


जन्म के साथ जैसे जैसे आदमी बड़ा होते जाता है वैसे वैसे शरीर में जीव वैज्ञानिक परिवर्तन होते जाते हैं। इन परिवर्तनों को रोका नहीं जा सकता। अंततः इन जीव वैज्ञानिक परिवर्तनों का अंतिम पड़ाव होता है - बुढ़ापा। बढ़ती उम्र के साथ-साथ व्यक्ति की दैनिक क्रियाओं की गति धीमी होने लगती है जिसके कारण उसकी शक्ति और संवेदनशीलता कम होने लगती है। तब उसे आवश्यकता होती है किसी अपने के सहारे की। पर यही अपने उन्हें एक मुसीबत समझ कर स्वयं से दूर कर देते हैं। इस स्थिति में यह बुजुर्ग, वृद्ध सहारा लेते हैं - वृद्धाश्रम का। श्रीराम भक्त हनुमान बाग सेवा समिति सामाजिक एवं लोकउपकारी मानवीय सेवाओं के लिये एक वृद्धाश्रम जिसे ’श्रीराम आश्रय’ के नाम से प्रारंभ करने के लिये कृतसंकल्पित है। ’’श्रीराम आश्रय में बुजुर्गों एवं असहाय वृद्धों की शारीरिक एवं मानसिक स्थितियों में सुधार लाकर उनमें आध्यात्म की ज्योति प्रकाशित करने का प्रयास किया जायेगा।